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वशीकरण

वशीकरण का अर्थ है किसी को अपने वश में कर अपनी इच्छा अनुसार कार्य करवाना। इसका प्रयोग प्रेमी-प्रेमिका, नौकर-मालिक या किसी पर भी कर अपनी इच्छा अनुसार कार्य करवा सकते हैं। इसके अनेको फायदे है जिनका हम निजी जीवन में लाभ ले सकते है।

उच्चाटन

किसी भी व्यक्ति के मन में कार्य के प्रति विरोधी भावना रखने वाले के गुणस्थान आदि के प्रति अरुचि पैदा कर दी जाती है जिससे शत्रु से विकर्षण और कार्य के प्रति आकर्षण बन जाता है। उच्चाटन प्रयोग उनके लिए बहुत ही उपयोगी साबित होता है जो किसी के वशीभूत हो चुके हैं होते हैं अपने कर्मपथ से भटक जाते हैं

काली साधना

10 महाविद्याओं में से साधक महाकाली की साधना को सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली मानते हैं, जो किसी भी कार्य का तुरंत परिणाम देती हैं। साधना को सही तरीके से करने से साधकों को अष्टसिद्धि प्राप्त होती है। काली की पूजा या साधना के लिए किसी गुरु या जानकार व्यक्ति की मदद लेना जरूरी है।

शत्रु नाशक पूजा

सांसारिक जीवन में इंसान मित्र व शत्रु दोनों ही होते है। पर जब किसी शत्रु के कारन जीवन मुश्किल हो जाये तो, इस पूजन द्वारा उस शत्रु को स्वयं से दूर किया जा सकता है अथवा उसके मन में जो शत्रुता का भाव है उसे बदला जा सकता है।

मनिच्छित विवाह पूजा

मनिच्छित जीवन साथी को साथ पाने व उनसे विवाह करना सभी चाहते है, परन्तु जाती धर्म व समाज के अनुसार उसे कई परेशानी का सामना करना पड़ता है, ऐसे में मनिच्छित वशीकरण पूजा कर वो अपने साथी से विवाह कर सकता है, व अपने परिवार को भी खुश रख सकता है।

सम्मोहन तंत्र पूजा

समोहन किसी भी व्यक्ति व वस्तु को अपने हिसाब से चलाने की कला है। जिसके द्वारा मनुष्य उस अर्धचेतनाव्सथा में लाया जा सकता है जो कि समाधि व स्वप्नावस्था से मिली जुली होती है इस प्रयोग द्वरा मनुष्य अपनी प्रत्येक इत्छा अथवा मनोकामना पूरी कर सकता है।

लक्ष्मी पूजा

धन-धान्य की देवी लक्ष्मी को सभी प्रसन्न कर आशीर्वाद पाना कहते है। कारण भी साफ है कि वर्तमान समय में धन की संसार में जो स्थिति है वह अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। जीवन यापन तो क्या अब तो सम्मान भी व्यक्ति के धन को देखकर ही किया जाता है। माँ की कृपा से धन व सम्पनता प्राप्त होती है।

दस महाविद्या साधना

दस महाविद्या साधना मां महाकाली से आरंभ होकर मां त्रिपुरसुंदरी पर समाप्त होती है। दस महाविद्या अपने आप में एक संपूर्ण साधना पद्धति है। इसमें मां भगवती के दस अलग-अलग शक्ति स्वरूपों की पूजा की जाती हैं। भक्त अपनी श्रद्धानुसार किसी भी एक देवी की आराधना कर उन्हें सिद्ध कर सकते हैं।
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